कामिनी की कामुक गाथा (भाग 37)


पिछली कड़ी में आप लोगों ने पढ़ा कि किस तरह मैं एक ऑटो ड्राइवर श्यामलाल और उसके साथी बलराम के संपर्क मे आई और उनके साथ रंगरेलियां मनायी। यह सिलसिला एक बार शुरू हुआ तो आज तक बदस्तूर, निर्बाध जारी है। मेरी इस उम्र में भी (मैं अब 51 साल की हूँ) वे अपनी वासना की भूख मिटाने के लिए मेरे आकर्षण में खिंचे चले आते थे। हालांकि उनका संबंध कई स्त्रियों के साथ रह चुका था और आज भी अपनी हवस बुझाने के लिए किसी भी उम्र की, किसी भी स्तर की, किसी भी रूप रंग, आकर प्रकार की स्त्रियों के पीछे कुत्तों की तरह पड़े रहते थे लेकिन उनकी स्वीकारोक्ति के अनुसार आजतक जितनी औरतों के साथ संभोग किया, मुझसे बेहतर संभोग की संतुष्टि और आनंद कहीं प्राप्त नहीं हुआ, शायद मेरे शारीरिक गठन के बावजूद लचीलेपन के कारण विभिन्न मुद्राओं में कामक्रीड़ा हेतु सक्षम होने की वजह से। यह स्वीकारोक्ति मेरी झूठी प्रशंसा भी हो सकती है, जिससे मैं इनकार नहीं कर सकती हूं, लेकिन मैं तो खूब आनंद उठा रही थी और अब भी उठा रही हूं।

पिछली कड़ी में मैंने जिक्र किया था कि बलराम के ड्राइवरों के साथ भी मेरा शारीरक संबंध स्थापित हो चुका था। यह किस तरह हुआ वही मैं बताने जा रही हूं।

बलराम के चार ड्राइवरों में एक पचपन साल का आदमी धर्मेश यादव जी को पारिवारिक संबंध से इतर सेक्स में कोई रुचि नहीं थी लेकिन बाकी तीन लोग अपने मालिक बलराम की जूठन चाटने में पीछे नहीं थे। अपने मालिक की मेहरबानी से ऐसी कई स्त्रियों से उन्होंने परिचय बढ़ा कर उनपर हाथ साफ किया और करते आ रहे हैं। उन्हीं स्त्रियों की श्रेणी में मैं भी आती हूँ। यह बात अलग है कि उनमें से किसके साथ और कब, अकेले या सामूहिक रूप से मैं अपने शरीर की कामपिपासा शांत करूंगी, इसे मैं खुद तय करती थी। इसकी शुरुआत बलराम के संपर्क में आने के करीब दो महीने बाद हुई। उन तीन लोगों में, साहिल 55 साल का छरहरे बदन का सांवला, साधारण शख्शियत वाला, लंबोतरा चेहरा, लंबी नाक, आधे बाल सफेद, छ: फुटा मुसलमान, तेजेन्द्र सिंह 50 साल का करीब साढ़े पांच फुट का हट्ठा कट्ठा, गोरा चिट्टा पंजाबी, एक नंबर का पियक्कड़ और तीसरा एक स्थानीय आदीवासी, घासीराम, काला, गंजा, नाटा सा करीब साढ़े चार फुट का मोटा ताजा 60 वर्षीय खड़ूस, तीनों में सबसे अधिक कुरूप, बेढब शरीर वाला किंतु अत्यधिक कामुक।

एक दिन पूर्वनियोजित योजना के अनुसार ऑफिस से निकलने के बाद, करीब साढ़े सात बजे श्यामलाल मुझे लेकर बलराम के घर आया। बलराम घर में हमारा ही इंतजार कर रहा था। उसका घर हमारे घर से करीब आधा कि. मी. आगे बस्ती से बाहरी छोर पर है। काफी बड़ा दोमंजिला घर है जो करीब तीन हजार वर्गफुट में फैला हुआ है। घर का मुख्य द्वार पूरब की ओर है। उत्तर की ओर एक काफी बड़ा गैराज है जिसमें उसकी चारों गाड़ियों के लिए पार्किंग का समुचित स्थान है। गैराज से सटा हुआ 12/12 का एक बड़ा सा कमरा, जिसे प्रायः विश्रामगृह के रूप में उपयोग किया जाता है, उससे जुड़ा हुआ एक स्नानगृह और शौचालय है।

वैसे तो मैं अपने व्यवसायिक कार्यों के सिलसिले में यहां वहां जाकर क्लाईंट्स से मिलते और कई अवसरों पर पार्टियां अटेंड करते करते थोड़ा बहुत पीना सीख गई थी। कुछ पियक्कड़ क्लाईंट्स की रातें रंगीन करते करते मुझे भी शराब की लत लग गई थी। उस दिन बलराम कुछ अधिक ही बेसब्र हो रहा था। मैं जब श्यामलाल के साथ उसके घर पहुंची तो दरवाजा बलराम ने ही खोला और बड़ी बेसब्री से मुझे बाहों में भींच कर ताबड़तोड़ चुम्बनों की बरसात कर बैठा। एक पल के लिए तो मैं घबरा गई थी। मेरे संभलने के पहले ही मुझे अपनी बांहों में उठा कर सीधे बिस्तर पर ला पटका।उसके बाद जो हुआ, क्या बताऊँ, खूब जम कर मेरी कुटाई हुई। कामांध श्यामलाल भी बलराम के साथ मिलकर इस दो घंटे की कमरतोड़ संभोग के दौरान मुझे भंभोड़ता रहा, झिंझोड़ता रहा, निचोड़ता रहा। इस पूरी कामलीला के दौरान उनके साथ तीन पैग शराब का चढ़ा गई थी। जब पूरी तरह निचुड़ कर लड़खड़ाते कदमों से बाहर निकल रही थी तो मेरी हालत देखकर बलराम ने घासीराम को आवाज दी जो उस वक्त विश्रामगृह में आराम कर रहा था। वह करीब एक घंटे पहले ही पटना से लौटा था और कमरे में शराब पी कर अपनी थकान उतार रहा था।

“घासीराम, क्या कर रहे हो? मैडम को जरा घर तक छोड़ दो।”

“आया साहब” कहते हुए वह कमरे से बाहर आया, सिर्फ लुंगी और बनियान में था वह। मेरे लड़खड़ाते कदमों और मेरी अस्त व्यस्त हालत को देखकर सब कुछ समझ गया था वह। मुझे अपनी बांहों का सहारा दे कर कार की ओर ले चला लेकिन कार में बैठाने की जगह गैराज से सटे विश्रामगृह में ले आया।

“आप बैठिए मैडम, जरा कपड़े तो पहन लें।” कहकर मुझे सामने बिस्तर पर बैठा दिया और कमरे का दरवाजा बंद कर दिया।

“दरवाजा क्यों बंद कर दिया?” मैं सशंकित हो उठी, क्या उस खड़ूस की नीयत डोल गई मुझ पर?

“जी कपड़े बदल रहा हूं ना”

“बेशरम, मैं तो सामने हूँ ना।” मैं बोली। लेकिन तबतक वह अपनी लुंगी उतार चुका था। हे भगवान! अंडरवीयर उसका विशाल तंबू बना हुआ था। साफ दिख हो रहा था कि वह उत्तेजित है। तंबू का आकार बता रहा था कि काफी बड़े लिंग का स्वामी है वह, मगर कितना बड़ा? मैं उत्सुक हो उठी। पिछले दो घंटे के नोच खसोट से मेरे शरीर का सारा अंग अंग टूट रहा था किंतु शराब का नशा अब भी सर चढ़ कर बोल रहा था। एक नंबर की वासना की पुतली तो थी ही, उस ठिंगने आदीवासी के अंडरवियर का इतना विशाल तंबू मुझे फिर से आकर्षित कर रहा था। लेकिन मेरी कमीनगी तो देखिए, चेहरे से जाहिर नहीं कर रही थी कि मैं उसके लिंग के दीदार को ललायित हूं। मैं तिरछी नजरों से ही देख रही थी। वह खड़ूस भी कम खेला खाया नहीं था। मेरी नजरों को पढ़ चुका था कमीना। मैं खड़े होकर दूसरी ओर मुड़ने की कोशिश में जानबूझकर लड़खड़ाई और गिरने का नाटक करने लगी। तभी घासीराम ने झपट कर मुझे थाम लिया।

“अरे आप खड़ी क्यों हो रही हैं। बैठिए, अभी हम ले चलते हैं।” मुझे थाम कर फिर से बिस्तर पर बैठा दिया, लेकिन इस क्रम में उसने मेरी चूचियों को हाथ लगा दिया था। मैं गनगना उठी। उसके तंबू के अंदर से उसका लिंग भी मेरी जांघों के बीच दस्तक दे दिया था। अब मेरा धैर्य जवाब देने लगा। मेरी योनी पानी छोड़ने लगी।

“मुझे पता नहीं क्या हो रहा है?” मैं नशे का अभिनय करते हुए बोली।

“आप थोड़ी देर लेट जाईए, कुछ देर में जब ठीक लगेगा तो हम पहूंचा देंगे।” कहते हुए मुझे बिस्तर पर लिटा दिया। आंखें बंद करके मैं पांव फैला कर पसर गई। घासीराम लार टपकाती नजरों से मुझे सर से पांव तक घूरता रहा। शायद झिझक रहा था मुझ पर हमला करने से। मैं अधमुंदी आंखों से उसकी हालत देख रही थी। उसे ललचाने के लिए मैंने अपने दोनों हाथ फैला दिए, साड़ी का पल्लू एक तरफ हो गया, मेरी दोनों बड़ी बड़ी चूचियां छोटे से ब्लाऊज को फाड़कर बाहर निकल पड़ने को बेताब थे। कुछ पलों के बाद जब उसे लगा कि मैं सो गयी, वह मेरे करीब आया और आहिस्ते से मेरे बगल में बैठ गया। उसकी सांसे धौंकनी की तरह चल रही थीं। उसने धीरे से मेरे सीने की ओर हाथ बढ़ाया और ब्लाऊज के ऊपर से ही मेरी चूचियों को सहलाना शुरू किया। उफ, मेरी चूचियों पर उसके हाथों की छुअन से मेरा शरीर अंदर तक तरंगित हो उठा। मैं अपनी उत्तेजना को बमुश्किल काबू में रख पा रही थी। अब वह थोड़ा और हिम्मत बटोर कर मेरे ब्लाऊज को खोलना शुरू किया। किसी तरह मेरे कसे हुए ब्लाऊज को सामने से खोल तो लिया, लेकिन अब मेरी ब्रा को कैसे खोलता। ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूचियों को सहलाने लगा। मेरा दिल भी उत्तेजना के मारे धाड़ धाड़ धड़क रहा था। मैं गहन निद्रा का ढोंग करती हुई करवट ले कर पलट गई। घासीराम झट से अपना हाथ खींच लिया। उसने कुछ पलों तक इंतजार किया, फिर दुबारा अपना हाथ मेेेरे ब्लाऊज को पूरी तरह खोलने की कोशिश करने लगा। मैंने अपने हाथ ढीले छोड़ रखे थे जिस कारण उसे मेरे ब्लाऊज को पूरी तरह खोलने में कोई परेशानी नहीं हुई। अब उसने मेरी ब्रा का हुक पीछे से खोल कर मेरी चूचियों को बंधन से मुक्त कर दिया। जैसे ही मुझे अहसास हुआ कि मेरी ब्रा का हुक खुल गया है मैं पुनः करवट बदल कर पूर्ववत हो गई, गहरी निद्रा का ढोंग करती हुई। एक पल के लिए वह चौंक कर अपने स्थान से खिसक गया। मेरे चेहरे को गौर से देखने लगा कि मैं जाग तो नहीं रही हूं। जब उसे विश्वास हो गया कि मैं सचमुच में नशे की जोर से नींद में ही हूं, वह पुनः मेरे पास आया और आहिस्ते से मेरी ब्रा को हटाने लगा। जैसे ही मेरी ब्रा का आवरण मेरी चूचियों पर से हटा, उसका मुह खुला का खुला रह गया। शायद अश्चर्य से कि इतनी बड़ी बड़ी चूचियां इस ब्रा से कैसे संभली हुई थीं। मेरी उत्तेजक चूचियों की खूबसूरती खूबसूरती में चार चांद लगा रहे थे तने हुए बड़े बड़े निप्पल्स। पहले वह धीरे धीरे सहलाया मेरी नग्न चूचियों को, निप्पल्स को चुटकियों में पकड़ कर शायद अपनी नजरों के विश्वसनीयता की ताकीद कर रहा था। अब उसे थोड़ी और हिम्मत आ गई थी। वह धीरे धीरे मेरी चूचियों को दबाने लगा। कुछ मिनटों के बाद अपने मुह से पहले मेरी चूचियों को चूमा, फिर हौले हौले मेरे निप्पल्स को चूसने लगा। इधर मेरी हालत बद से बदतर होती जा रही थी। वे पल मेरे लिए बेहद मुश्किल भरे थे। इस उत्तेजक क्रिया से भड़कती अपनी काम ज्वाला को नियंत्रित करना अब असंभव होता जा रहा था मेरे लिए। मेरे शरीर का ऊपरी भाग निर्वस्त्र हो चुका था। उसका एक हाथ अब धीरे धीरे नीचे खिसकते हुए मेरी नाभी से नीचे पहुंच चुका था। धीरे धीरे कमर में खोंसी हुई मेरी साड़ी को खोला और मेरे पेटीकोट के नाड़े की गांठ तलाशने लगा। ज्यों ही नाड़े का गांठ हाथ लगा, एक हल्के झटके से पेटी कोट ढीला कर दिया। अब उसके लिए समस्या थी कि इस अवस्था में मेरे शरीर से साड़ी और पेटीकोट अलग कैसे किया जाय।

वैसे भी अब उस बौने चुदक्कड़ के सब्र का पैमाना भर चुका था। जल्दी जल्दी किसी प्रकार खींच खांच कर अंततः मुझे साड़ी और पेटीकोट से मुक्त कर दिया। वह बार बार मेरे चेहरे को देखता जा रहा था कि कहीं मैं जाग तो नहीं रही हूँ, मगर मैं भी एक नंबर की नौटंकी बाज, उसे अहसास तक नहीं होने दिया कि मैं पूरे होशोहवास में हूं। अब सिर्फ रह गयी मेरी पैंटी। उधर उसकी हालत खराब और इधर मेरी। उफ्फ्फ, इंतजार की घड़ियां कितनी लंबी होती हैं, इसका अहसास मुझे अब हो रहा था। पैंटी के ऊपर से ही मेरी फूली हुई योनी को बड़े ही अविश्वसनीय नजरों से एकटक देखता रह गया। मेरी योनी के रस से भीगी पैंटी देख कर शायद उसे कुछ कुछ आभास होने लगा कि मैं जाग रही हूं। आखिर वह भी एक नंबर का चुदक्कड़ जो ठहरा, लेकिन मैं भी कम कमीनी नहीं थी, अब नींद का ढोंग छोड़ कर नशे का ढोंग करने लगी।

नशे से बोझिल अधमुंदी आंखों से देखती हुई लड़खड़ाती आवाज में बुदबुदाई, “क्क्क्क्य्य्य्य्आ्आ्आ क्क्क्क्र्र्र्र्र र्र्र्र्रहे होओ्ओ्ओ्ओ” बोलना अभी खत्म भी नहीं हुआ कि घासीराम एक ही झटके में मेरी पैंटी को नोच फेंका और लो, विस्मय से उसकी आंखें फटी की फटी रह गयीं, मुह खुला का खुला रह गया।

“बाप रे, बाप, ऐसी चूत!” अनायास उसके मुह से निकला।

“आ्आ्आ्आ्आ्आह्ह्ह्ह्ह्, नंगी क क क्योंओंओं कककर्र्र््र दिया कमीनेए्ए्ए्ए?” मैं अब भी नशे में टुन्न होने का दिखावा कर रही थी।

“मैडमजी, आप का तो कहना ही क्या। चूची तो चूची, इत्त्त्त्त््त्त्आ्आ्आ्आ्आ चिकना और मालपुवे जैसा बूर पहली बार देखा। साली चुदक्कड़।” अब वह खुल कर मैदाने जंग में कूद पड़ने को उतावला हो उठा था। फटाफट अपने बनियान और अंडरवियर को उतार फेंंका। अब चौंकने की बारी मेरी थी। मादरजात नंगा मोटा ताजा, काला कलूटा, ठिंगना, तोंदू बदन किसी जंगली भालू की तरह दिख रहा था, उस पर आठ इंच का लंबा, जांघों के बीच झूलता, लपलपाता काला लिंग!

“ओह्ह्ह्ह भगवान, यह ततततुम ममममेरे साथ ककक्या्आ्आ कककककरने जजजजा्आ्आ रहे हो?” मैं हकलाहट का प्रदर्शन करते हुए घबराई आवाज बना कर बोली।

“इतना भी भोली मत बनो मैडम जी। आप की भीगी चूत और मेरा टनटन करता लौड़ा, अब आगे क्या होने वाला है यह भी बताना पड़ेगा क्या?” उसकी हिम्मत की कायल हो गई मैं।

“बबबबताआआने की जजजजरू्ऊ्ऊ्ऊरत नहीं है, लेकिन पपपपप्लीईईईज, मेरे साथ ऐसा मत ककककरो। मैं ऐसी औरत ननननहींईंईंई हूँ, छोड़ दो मममुझे, जजजजानेएएए दो।” मैं उठने की कोशिश करती हुई अपना ड्रामा जारी रखे हुए थी।

“क्या बोली? ऐसी औरत नहीं हैंं आप? साली कुतिया, सत्तर चूहे खाके बिल्ली चली हज को? आपकी चूत किसी गधी की चूत से कम है क्या? किसी औरत की चूत ऐसी होती है क्या? मां की लौड़ी। पता नहीं कितने मर्दों का लौड़ा घुस चुका है इस चूत में साली शरीफ की चूत। अब चोदने दे चुपचाप हरामजादी।” खूंखार लहजे में बोला।

“नहीं पपपप्लीईईईज” प्रत्यक्षतः मैं गिड़गिड़ाने लगी किंतु अंदर से तो ऐसे लंड को देखकर चुदने के लिए बेकरार हो रही थी।

“अब ना नुकुर करने से कोई फायदा नहीं। चल तैयार हो जा मेरा लौड़ा खाने के लिए, साली रंडी।” बड़ी उतावली से उसने मेरे पैरों को फैला कर ठीक मेरी चूत के मुहाने पर अपने लंड का सुपाड़ा टिकाया। मैं इधर उधर होने की बेमतलब कोशिश करती दांत भींच कर उसके हमले का इंतजार कर रही थी। तभी उसने मेरी कमर को सख्ती से पकड़ कर गच्च से अपने लिंग का एक हौलनाक प्रहार मेरी योनी पर कर दिया, “हुम्म्म्म्मा्ह्ह्ह्ह”।

“”आह, मर गई मैं, ओह मां निकालो, हाय रे मेरी फटी,” मैं चीखी। एक ही करारे धक्के से उसने मेरी पनियायी योनी में अपना पूरा लिंग उतार दिया था।

“आह्ह्ह्ह्ह, तेरी चूत इतनी टाईट कैसे है मैडम? ओह साली देखने में इतना बड़ा गधी के बूर जैसा, ओह मगर अंदर इतना टाईट! तेरी चूत के अंंदर तो गरमागरम भट्ठा है। कमाल की चूत है। वाह मजा आ गया लंड घुसा कर।” वह बड़ी प्रसन्नता से बोला।

“ओह्ह्ह्ह हरामी, यह क्या कर दिया रे्ए्ए्ए्ए्ए्ए। हाय हाय, माआआआआर्र्रररररर डाआआआलाआआआ। बरबाद कर दिया मुझे” मैं छटपटाते हूए बोली। अंदर ही अंदर तो खुश हो रही थी कि चलो अंततः इंतजार की घड़ियां खत्म हुई।

“चुप हरामजादी कुतिया। हम तुझे क्या बरबाद करेंगे। तू तो पहले से खेली खाई चुदक्कड़ है। तेरी मालपुवे जैसी चूत को देखकर सब समझ में आता है। नाटक मत कर मैडम, चोदने दे आराम से।” ऐसा कहते कहते अब पूरी तरह शुरू हो गया। उसका मुह मेरी चूचियों तक पहुंच रहा था, फलस्वरूप वह मेरी चूचियों पर अपना मुंंह लगा दिया। उसकी जीभ किसी कुत्ते से कम नहीं थी। लंबी जीभ से चपर चपर मेरी चूचियों को चाटने लगा।

“आह्ह्ह्ह्ह” मैं अब और अपना नाटक कायम नहीं रख सकी। आनंदमयी सिसकारी निकाल बैठी।

“अब आ रहा है ना मजा। सब समझ में आ गया साली चुदक्कड़ औरत। अब देख कैसे चोदते हैं तुम्हें।” अब वह पिल पड़ा मुझ पर और दनादन दनादन पूरी रफ्तार से चोदने लगा। पूरे कमरे में फच्च फच्च की आवाज गूंजने लगी। मेरी चूचियों को चूसते हुए बीच बीच में अपने दांत गड़ा देता था जिससे मैं चिहुँक उठती थी।

अब मैं भी पूरे रंग में आ गई थी। अपने पैरों को उसकी कमर को लपेट कर पीठ पर चढ़ा बैठी थी और अपनी चूतड़ उछाल उछाल कर उसके हर ठाप का जवाब ठाप से देने लगी। “आह राजा, ओह चोदू, हाय मेरे ठिंगने बलम, चोद अहा चोद, मुझे बना दिया रे रंडी, ओह्ह्ह्ह मेरी चूत की मस्ती उतार दे साले मां के लौड़े, प्यारे मादरचोद, आह”, मैं असलीयत पर उतर आई थी।

“हां रे रंडी मैडम, साली कुत्ती मैडम, लंडखोर मैडम, ले ले और ले हरामजादी मैडम, बुरचोदी मैडम, हुम्म्म्म्म्म्म हुम्म्म्म्म्म्म, हुम्म्म्म्म्म्म” धकाधक भीषण चुदाई किए जा रहा था। करीब बीस मिनट तक घमासान चुदाई से मुझे निहाल कर दिया।

“आ्आआह्ह्ह्ह” मैं संभोग के चरम पर पहुंच कर झड़ने लगी तभी वह भी झड़ने को हुआ। उसका लिंग अकड़ कर और बड़ा रूप ले चुका था, अचानक ही उसने अपना लिंग मेरी चूत से निकाल कर कूद कर मेरे मुह के पास ले आया। मैं आह्ह्ह्ह्ह भर ही रही थी कि मेरे खुले मुह में अपने लिंग को ठूंस दिया और अपना नमकीन और कसैला प्रोटीनयुक्त वीर्य मेरे हलक में उतारता चला गया। उत्तेजना के आवेग में मैं भी गटगट पीती चली गई उसका गरमागरम लावा। पूरी तरह खलास हो कर ही वह मेरे ऊपर से हटा।

“आह्ह्ह्ह्ह, इतनी मस्त हो मैडम तुम, ओह्ह्ह्ह मजा आ गया चोदकर” चटखारे लेता हुआ वह बोला।

“ओह मेरे बौने बलम, तूने भी कुछ कम सुख दिया क्या, ओह राजा, दिल खुश कर दिया मेरे राजा,” मैं बेसाख्ता उसके बेढंगे शरीर से चिपट गई और उसके कुरूप चेहरे पर चुंबनों की बौछार कर बैठी।

“तो कसम खाओ मैडम कि अब से हमें भी अपनी चूत खिलाती रहोगी,” वह बोला।

“अरे हां रे हां मेरे चोदू,” मैं बोली।

तभी हम चौंक पड़े, “साले मादरचोद, इतनी मस्त माल को अकेले अकेले चोद लिया।” एक अजनबी आवाज पीछे से आई। सर उठा कर देखा तो एक हट्ठा कट्ठा, करीब 50 साल का सरदार खड़ा था। इससे पहले कि घासीराम कुछ बोलता, सरदार बोलने लगा, “साले हरामी, आज तक मजदूर रेजा, कोयला चुनने वाली औरतों और भिखमंगी औरतों को चोदने वाले कमीने, आज एक खूबसूरत औरत मिली तो अकेले अकेले हाथ साफ कर लिया भैणचोद।”

मैं पूरी नंगी अवस्था में अपने को ढंक सकने में अक्षम थी। मेरे कपड़े फर्श पर पड़े मुझे मुह चिढ़ा रहे थे। मैं हड़बड़ा कर उठना चाह रही थी कि सरदार ने मुझे दबोच लिया। “जाती कहाँ है मेरी जान, अभी तो मैं बाकी हूँ। कुछ देर में साहिल भी आ जाएगा। साली भैण की लौंडी, जब तक हम तुझे चोद नहीं लेते तू यहीं पड़ी रह। अबे ओ कलुए, मादरचोद, ग्लास में दारू डाल, अब मेरे साथ मैडम भी पिएगी। फिर मैं अपने लौड़े का जलवा दिखाऊंगा इस मैडम को। पहली बार ऐसी मस्त माल मिली है।” हाय राम, मैं यह कहाँ फंस गई थी।

आगे की घटना अगली कड़ी में।

तबतक के लिए इस कामवासना की पुतली रजनी को आज्ञा दीजिए।

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Rajni4u

मैं एक 51 साल की विधवा शिक्षिका हूँ। मैं कामोत्तेजक कहानियां पढ़ना, दोस्ती करना और दोस्तों से किसी भी प्रकार की चैटिंग करना पसंद करती हूं। मेरी रुचि संगीत में भी है। फिलहाल मैं अपनी कामुक भावनाओं को कहानियों के माध्यम से लोगों के सम्मुख प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही हूं।